सरकार का बड़ा फैसला! हैदराबाद गैजेट लागू करने को सिद्धांत रूप से मंजूरी, पूर्व न्यायमूर्ति शिंदे का मनोज जरांगे को संदेश
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सरकार का बड़ा फैसला! |
Sandeep Shinde on Maratha Reservation: पूर्व न्यायमूर्ति संदीप शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार ने हैदराबाद गैजेट लागू करने को सिद्धांत रूप से मंजूरी दी है।
Sandeep Shinde Meets Manoj Jarange Patil: महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज के आरक्षण मुद्दे को हल करने के लिए बनाई गई उपसमिति की आज की बैठक के बाद मनोज जरांगे पाटिल से मिलने के लिए राज्य सरकार का प्रतिनिधिमंडल भेजा था। मराठा आरक्षण के लिए गठित की गई सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति के सदस्य और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात कर चर्चा की।
बैठक के दौरान पूर्व न्यायमूर्ति संदीप शिंदे ने मनोज जरांगे से कहा कि “राज्य सरकार ने हैदराबाद गैजेट लागू करने को सिद्धांत रूप से मंजूरी दी है।” इस पर मनोज जरांगे की राय लेकर शिंदे समिति के सदस्य अब मंत्रिमंडल उपसमिति से मुलाकात करेंगे।
मनोज जरांगे से मुलाकात के बाद संदीप शिंदे ने क्या कहा?
पूर्व न्यायमूर्ति संदीप शिंदे ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “किसी हद तक जरांगे जी संतुष्ट हुए हैं। उनकी दी गई सुझावों को हम मंत्रिमंडल उपसमिति के सामने रखेंगे। कुछ बातों को सरकार ने सिद्धांत रूप से मंजूरी दी है। उस पर जरांगे जी की राय मंत्रिमंडल को बताएंगे। इसके बाद मंत्रिमंडल आगे का फैसला करेगा। फिलहाल सरकार ने हैदराबाद गैजेट को सिद्धांत रूप से मंजूरी दी है।”
"सरकार का बड़ा फैसला! हैदराबाद गैजेट लागू करने को सिद्धांत रूप से मंजूरी, पूर्व न्यायमूर्ति शिंदे का मनोज जरांगे को संदेश"
मराठा और कुणबी एक ही हैं, इस पर सरकार को अधिसूचना जारी करनी चाहिए, यह मनोज जरांगे पाटिल की मांग है। क्या इस पर फैसला हो सकता है? इस सवाल पर संदीप शिंदे ने कहा, “फिलहाल हैदराबाद रियासत के गैजेट पर फैसला लिया गया है। इस पर मैं और कुछ नहीं कह सकता। मंत्रिमंडल इस पर फैसला करेगा।”
क्या है हैदराबाद गैजेट?
हैदराबाद की निजामशाही सरकार ने मराठा समाज के आरक्षण के संदर्भ में 1918 में एक आदेश यानी गैजेट जारी किया था। निजाम के शासन में मराठा समाज बहुसंख्यक था। लेकिन शिक्षा और नौकरी में उनकी उपेक्षा होती थी, इसलिए निजाम ने मराठा समाज को ‘हिंदू मराठा’ के नाम से शिक्षा और नौकरी में आरक्षण दिया था। उनके लिए कुछ सीटें आरक्षित रखी गई थीं। मराठा आरक्षण के अब तक के आंदोलनों में इस गैजेट का लगातार हवाला दिया जाता रहा है।

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